Thursday, October 19, 2023

Malkit Singh Unveils New Song "Mobile" at Ravi Sarin Film Institute









Malkit Singh Unveils New Song "Mobile" at Ravi Sarin Film Institute


Noida,- film City 
Celebrated Indian singer Malkit Singh, known for hits like 'Kaali Ainak', wowed audiences with his latest release, the song "Mobile," at Noida's esteemed Ravi Sarin Film Institute.
Welcomed by over 100 enthusiastic students, Malkit joined in the festivities, dancing to his new track upon his arrival from England.
During the press meet, Malkit discussed the unique challenge of creating a song centered on today's omnipresent mobile technology.
The video carries a playful yet heartfelt message as Malkit expresses his desire to turn into a mobile phone so that he can always be by his beloved's side. He laments how his beloved is always focused on her phone, leaving little room for him.

Ravi Sarin, a veteran with over 250 major film projects, warmly greeted Malkit at the institute. He highlighted the institute's distinction, offering students unparalleled opportunities to work on significant films, given that 90% of such productions occur in Delhi and North India for which Sarin acts as line producer.
In a significant announcement, Malkit revealed that his upcoming film, 'Saade Lek', is set for release around the New Year. He expressed his intention to once again partner with Ravi Sarin for its promotional activities.
Harish Sharma

Monday, July 31, 2023

टिल्लन रिछारिया के मायने


टिल्लन रिछारिया के मायने

बात 1991की है इस वर्ष सुप्रसिद्ध हिन्दी लेखक कवि शैलेश मटियानी जी पिथौरागढ़ आए थे मेरी उनसे मुलाकात उनके भाई महिंदर मटियानी जी ने कराई थी। 

मेरे लिखे कुछ लेख शैलेश जी ने पढ़े थे उन्होंने मुझे सलाह दी तुम्हे दिल्ली में अपनी प्रतिभा का दोहन करना चाहिए। मैंने कहा गुरुदेव मैं दिल्ली में किसी मीडियाकर्मी को नही जानता। वो बोले मेरे साथ दिल्ली चलो मैं मिलवाऊंगा तुम्हे।

उन्होंने बताया दिल्ली में एक अखबार अभी निकलना शुरू हुआ है राष्ट्रीय सहारा वो वास्तव में हम जैसे हिन्दी लेखकों कवियों का सहारा बना है। तुमने यदि सहारा में पैठ बना ली तो जीत तुम्हारी होगी।

वो मुझे दिल्ली लेकर गए नोएडा सहारा में उन्होंने मेरी मुलाकत राष्ट्रीय सहारा में कई वरिष्ठ लोगो से कराई। उन्ही में एक टिल्लन रिछारिया जी भी थे शैलेश जी ने उनसे कहा टिल्लन जी यह हरीश शर्मा है मेरे शहर पिथौरागढ़ से प्रतिभाशाली है आपको सौप रहा हूं इसकी प्रतिभा को निखारने की जिम्मेवारी आपकी। 

शैलेश जी के लेख सहारा के हस्तक्षेप संस्करण में छपते थे । सहारा में प्रतिदिन उमंग नाम से चार रंगीन पेज प्रतिदिन छपते थे।

उमंग के सम्पादक थे टिल्लन जी । उनसे मुलाकात के बाद टिल्लन जी ने एक तरह से अनजान दिल्ली में मेरे अभिवाहक की भूमिका निभाई । लगभग रोज ही मेरा एक लेख तो उमंग में छपता ही था कई बार तो तीन चार लेख छपते थे। 

सहारा और टिल्ल्न जी ने ही हिन्दी वालो को समझाया हिंदी लेखकों की कद्र कैसे की जाएं। नोएडा में मेरा घर 10 मिनट पैदल दूरी पर था जिसका लाभ यह हुआ मैं करीब रोज ही सहारा पहुंच जाता । अगले दिन क्या छपना है टिल्लन जी और उनके साथी उपसंपादक दिनेश रावत जी मुझे पूछते क्या क्या लिख सकते हो मुझे तो पेट के भूख की चिन्ता थी मैं कहता जो भी आप कहे।

इस तरह मैं हर विषय पर लिखने लगा यह सिलसिला 1996 तक चला उस दौरान हर महिने मुझे सहारा में कार्यरत 90 % लोगों की सैलरी से अधिक पैसे मिलते थे । कई बार जब टिल्लन जी महीने के अन्त में बताते चैक बन गया है ले लेना, चैक लिए उनके पास जाता तो अक्सर आंखो में आंसू होते थे वो मेरे कन्धे पर हाथ रखते कहते तुम्हे बहुत आगे जाना है यह चैक छोटा सा है यही नहीं रुकना है । क्या आप यकीन करेगें 1992/93 में राष्ट्रीय सहारा अख़बार से मुझे 15 से 25 हजार रूपए महिने मिलते थे।

उनका motivation इतना प्रभावशाली होता था मैं रात भर लिखता 2/3 कार्बन लगा कर कॉपी करता जिससे वही लेख अन्य प्रदेश के अखबारों में भेज सकूं। दिल्ली में INS भवन में भारत भर के अखबारों के दफ्तर है उनमें लेख भेजता, यह भी टिल्लन जी ने ही बताया था।

जब मैं दिल्ली में स्थापित होकर थोड़ा सफल Pro हो गया फिल्मों गायकों का पीआर करने लगा। अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्हें बुलाता वो शायद ही कभी आते पर जब भी आते बहुत खुश होते पर जाते जाते एक बात और कहते बहुत खुश होने की जरूरत नही है अभी मंजिले और भी है ।

उन्होंने एक बार मुझे फोन किया बोले INS आईए 2 बजे यदि आपका कोई इवेंट नही हो तो, मुझे कुछ दो । मेरी समझ नही आया लेकिन मैं नियत समय पर पहुंच गया आईएनएस के नीचे चाय वाले के पास खड़े इन्तजार कर रहे थे । 

मुझे देख बोले परेशान मत हो दरअसल किसी ने कल मुझे कहा हरीश बड़ा आदमी बन गया है अब पुराने लोगो की परवाह नहीं करता मेरी उससे बहस हो गई मैं यह मानने को तैयार ही नहीं था कि आप बदल सकते है चलो चाय पिलाओ । 

चाय की चुस्की लेते बोले कभी बदलना मत । कुछ भी स्थाई नहीं है न काम न इंसान । सरल रहना आप अभी बहुत बड़े बनोगे लेकिन मेरे लिए सबके लिए आज जैसे ही रहना। मुझे खुशी है आज भी सरल हो।

2008 में मुम्बई चला गया । एक बार मुम्बई आएं तो फोन किया बोले कल क्या कर रहे हो अपना दिन मुझे दे दो । अगले दिन उन्होंने बहुत से लोगो से मिलवाया वो सब जगह दिखाई जब वो मुंबई में कार्यरत थे। 

मेरी बेटी बीमार हुई मेरी किताब आई मैं हैदराबाद रहा गोआ रहा वापस मुंबई आया वो हमेशा संपर्क में थे। हमेशा अग्रज के रूप में। 

माधवकांत मिश्रा जी का निधन हुआ तो दुखी मन से फोन किया ,बोले उनपर कुछ लिखना है चाहता हूं आप भी कुछ लिखिए उन पर आप शुरुआत से जानते है उन्हे।

पहली किताब आई तो फोन किया बोले किताब आ गई है आपको भी शामिल किया है उसमें। पढ़कर बताएं कैसी लगी। 

8/9 दिन पहले जब सबको दिल्ली वापस आने का मैसेज भेजा तो उनका रिप्लाई आया राजा की वापसी, जल्दी मिलते है ।

फिर 2 दिन पहले मित्र कृपाशंकर जी की पोस्ट से पता चला टिल्लन जी नही रहे । दिल दिमाग में कुछ टूटा ठीक वैसे ही जैसे अभय सिंह पापा जी प्रदीप संगम जी राजीव कटारा जी पिताजी सुरेश शर्मा जी अंकल के जाने पर टूटा था। 

जीवन कहां रुकता है किसी के जाने के बाद भी निर्बाध चलता रहता है । लेकिन मन के कोने में आंसू और टूटन हमेशा रहती है 

इसीलिए कहता हूं अपने मन के उदगार जीवन रहते ही व्यक्त करने चाहिए जीवन के बाद जाने वाले को कुछ पता नही होता आप उसके बारे में क्या सोचते है

विनम्र श्रद्धांजलि हमेशा यादों में टिल्लन Sir